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Sunday, 24 May 2020

Gulzar-


गुलज़ार 

इनका पूरा नाम सम्पूर्ण सिंह कालरा  हैं | ये प्रसिद्ध कवी, लेखक, शायर, गीतकार और निर्देशक हैं | आज के समय में बहुत कम की लोग है जो इन्हें न जानते हो | इनका जन्म 18 अगस्त 1936 को दीना,झेलम,जिला पंजाब, ब्रिटिश भारत में हुआ था | इन्हे 2004 में भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाला तीसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था और इन्हें 2009 में फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर में इनके द्वरा लिखे गीत जय हो को ऑस्कर से सम्मानित किया गया था | इनकी प्रमुख रचनाएँ चौरस रात, एक बून्द चाँद, जानम, रवि पार, खराशें आदि हैं |

Friday, 22 May 2020

Abbash Tabish -


अब्बाश ताबिश


अब्बाश ताबिश पाकिस्तान के मशहूर शायरों में से है | इनका जन्म 15 जून 1961 को लाहौर (पाकिस्तान) में हुआ था | अब्बाश ताबिश की प्रमुख गज़ले मोहब्बत की कहानी नहीं मरती  लेकिन और रक्स जारी हैं |

Rajesh Reddy -

राजेश रेड्डी  

राजेश रेड्डी एक हिंदी व उर्दू के सुप्रशिद्ध शायर है | शायर राजेश रेड्डी का जन्म 22 जुलाई 1952 को नागपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था | राजेश रेड्डी ज्यादातर समाज की सच्चाइयों पर शायरी कहते हैं | राजेश रेड्डी की बहुत सारे शेरो में एक अलग तरह का समाज के लिए सन्देश झलकता हैं | राजेश रेड्डी की प्रमुख रचनाएँ जाने कितनी उड़ान बाकी है, आसमां से आग,  उड़ान आदि हैं |

Uday Pratap Singh -

उदय प्रताप सिंह



उदय प्रताप सिंह एक कवि, साहित्यकार और राजनेता हैं | इनका जन्म 18 मई 1932  को मैनपुरी (उत्तरप्रदेश) में हुआ था | उदय प्रताप सिंह अपने बेबाक़ कविताओं और शेरों के लिए प्रख्यात है | उदय प्रताप सिंह कवि सम्मेलन व मुशायरों में अक्सर भाषायी एकता के मुद्दों पर बात करते हैं | 
इनकी प्रमुख रचनाएँ फूल और कली, गांव की तरफ, महका के घर रख दिया, कहानी छोड़ जाते है | 

Dushyant Kumar -

दुष्यंत कुमार 

 

दुष्यंत कुमार त्यागी एक हिंदी कवी, कथाकार और ग़ज़लकार थे | इनका जन्म 27 सितम्बर 1931 को बिजनौर (उत्तरप्रदेश) में हुआ था | निदा फ़ाज़ली इनके बारे में कहते है की दुष्यंत की नज़र उनके युग की नई पीढ़ी के गुस्से और नाराज़गी से सजी हैं | यह गुस्सा और नाराज़गी उस अन्याय और राजनीती के कुकर्मो के खिलाफ नए तेवरों की आवाज़ थी, जो समाज के मधयमवर्गी झूठेपन की जगह पिछड़े वर्ग की मेहनत और दया की नुमाईंदगी करती हैं | कहाँ तो तय था', 'कैसे मंजर', 'खंडहर बचे हुए हैं', 'जो शहतीर है', 'ज़िंदगानी का कोई','मकसदहो गई है पीर पर्वत-सी', अब तो पथ यही है इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं| 30 दिसम्बर 1975 को दुष्यंत कुमार ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया |

Bashir Badr -

बशीर बद्र 


बशीर बद्र उर्दू के महान शायरी में से एक हैं |  इनका पूरा नाम सैय्यद मोहम्मद बशीर है | इनका जन्म फैज़ाबाद (उत्तरप्रदेश) में हुआ था और ये भोपाल से भी ताल्लुक रखते हैं | बशीर बद्र दुनिया के दर्जनों मुशायरों  में शिरकत कर चुके हैं | साहित्य और नाटक अकादमी में अपने अहम योगदान के लिए 1999  में इन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया | बशीर बद्र की ग़ज़लों में वो खासियत है जो आमो खास को अपने और खींच लेती है| आस, फुलो की छतरियां, उजाले अपनी यादों के, सात जमीने एक सितारा  इनकी प्रमुख रचना है |

Parveen Shakir -

 परवीन शाकिर

 

परवीन शाकिर उर्दू की शायरा, शिक्षक, और पाकिस्तान की सिविल सेवा में एक अधिकारी थी | परवीन शाकिर का जन्म 24  नवम्बर 1952 को कराची, सिंध, (पाकिस्तान) में हुआ था | इनके बारे में एक किस्सा बहुत मशहूर है की जब एक बार ये 1982 में सेंट्रल सुपेरिअर सर्विस की लिखित परीक्षा में बैठी थी तो उस परीक्षा में उन्ही पर एक सवाल पूछा गया था | आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते है की वो पाकिस्तान में कितनी मकबूल थी | शायरी की दुनिया में हमेशा मर्द शायरों की ही हुकूमत रही है औरतों की बात भी यही करते रहे लेकिन परवीन शाकिर नें औरतों की बेवफाई, वियोग और तलाक जैसे विषयों पर शायरी कही जोकि एक औरत है समझ सकती है | 26 दिसम्बर 1994 को इस्लामाबाद में एक रोड एक्सीडेंट में इनकी मौत हो गयी | जिस रोड पर उनकी मौत हुई उस रोड का नाम इन्ही के नाम पर दिया गया जिसका नाम है "परवीन शाकिर रोड " | परवीन शाकिर की प्रमुख रचनाएँ खुली आँखों में सपना, ख़ुशबू, सदबर्ग, इन्कार, रहमतों की बारिश, ख़ुद-कलामी, इंकार, माह-ए-तमाम  हैं |

Jaun Elia -

   जॉन एलिया



दुबले पतले शरीर, लम्बे काले बाल , काला चश्मा और अपने ही धुन में रहने वाले ऐसे ही एक शख्सियत का नाम था ' जॉन एलिया '| जॉन एलिया साहब उर्दू के एक महान शायर, दार्शनिक और कवि थे | इनका जन्म उत्तरप्रदेश के अमरोहा में 18  दिसंबर 1931 को हुआ था | उन्हें आज के युवा शायरी का रॉकस्टार भी कहते हैं | जॉन पाकिस्तानी थे, मगर अदब से पुरे हिंदुस्तान में पड़े और सुने जाते थे | जॉन अभी के वक्त सबसे ज्यादा पड़े जाने वाले शायरों में से एक है, आज भी इनके शेर सोशल प्लेटफार्म में ट्रेंड पर रहते है | यानि, गुमान, लेकिन, गोया, इनकी किताबें है | जॉन का मुशायरा में शेर कहने का अंदाज़ बेहद अलग था जो आप यूट्यूब पर उनका मुशायरा वाला वीडियो में देख सकते हैं |  ज़िंदगी में खुद को नाकामयाब समझते वाले जॉन 8 नवम्बर 2002 को चल बसे |