Showing posts with label Parichay. Show all posts
Showing posts with label Parichay. Show all posts
Friday, 22 May 2020
Abbash Tabish -
अब्बाश ताबिश
Rajesh Reddy -
राजेश रेड्डी
राजेश रेड्डी एक हिंदी व उर्दू के सुप्रशिद्ध शायर है | शायर राजेश रेड्डी का जन्म 22 जुलाई 1952 को नागपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था | राजेश रेड्डी ज्यादातर समाज की सच्चाइयों पर शायरी कहते हैं | राजेश रेड्डी की बहुत सारे शेरो में एक अलग तरह का समाज के लिए सन्देश झलकता हैं | राजेश रेड्डी की प्रमुख रचनाएँ जाने कितनी उड़ान बाकी है, आसमां से आग, उड़ान आदि हैं |Uday Pratap Singh -
उदय प्रताप सिंह
उदय
प्रताप सिंह एक कवि, साहित्यकार और राजनेता हैं | इनका जन्म 18 मई 1932
को मैनपुरी (उत्तरप्रदेश) में हुआ था | उदय प्रताप सिंह अपने बेबाक़ कविताओं
और शेरों के लिए प्रख्यात है | उदय प्रताप सिंह कवि सम्मेलन व मुशायरों
में अक्सर भाषायी एकता के मुद्दों पर बात करते हैं |
इनकी प्रमुख रचनाएँ फूल और कली, गांव की तरफ, महका के घर रख दिया, कहानी छोड़ जाते है |
Dushyant Kumar -
दुष्यंत कुमार
दुष्यंत
कुमार त्यागी एक हिंदी कवी, कथाकार और ग़ज़लकार थे | इनका जन्म 27 सितम्बर
1931 को बिजनौर (उत्तरप्रदेश) में हुआ था | निदा फ़ाज़ली इनके बारे में कहते
है की दुष्यंत की नज़र उनके युग की नई पीढ़ी के गुस्से और नाराज़गी से सजी हैं
| यह गुस्सा और नाराज़गी उस अन्याय और राजनीती के कुकर्मो के खिलाफ नए
तेवरों की आवाज़ थी, जो समाज के मधयमवर्गी झूठेपन की जगह पिछड़े वर्ग की
मेहनत और दया की नुमाईंदगी करती हैं | कहाँ तो तय था', 'कैसे मंजर', 'खंडहर बचे हुए हैं', 'जो
शहतीर है', 'ज़िंदगानी का कोई','मकसदहो गई है पीर पर्वत-सी', अब तो पथ यही
है इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं| 30 दिसम्बर 1975 को दुष्यंत कुमार ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया |
Bashir Badr -
बशीर बद्र
Parveen Shakir -
परवीन शाकिर
परवीन
शाकिर उर्दू की शायरा, शिक्षक, और पाकिस्तान की सिविल सेवा में एक अधिकारी
थी | परवीन शाकिर का जन्म 24 नवम्बर 1952 को कराची, सिंध, (पाकिस्तान)
में हुआ था | इनके बारे में एक किस्सा बहुत मशहूर है की जब एक बार ये 1982
में सेंट्रल सुपेरिअर सर्विस की लिखित परीक्षा में बैठी थी तो उस परीक्षा
में उन्ही पर एक सवाल पूछा गया था | आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते है की वो
पाकिस्तान में कितनी मकबूल थी | शायरी की दुनिया में हमेशा मर्द शायरों की
ही हुकूमत रही है औरतों की बात भी यही करते रहे लेकिन परवीन शाकिर नें
औरतों की बेवफाई, वियोग और तलाक जैसे विषयों पर शायरी कही जोकि एक औरत है
समझ सकती है | 26 दिसम्बर 1994 को इस्लामाबाद में एक रोड एक्सीडेंट में
इनकी मौत हो गयी | जिस रोड पर उनकी मौत हुई उस रोड का नाम इन्ही के नाम पर
दिया गया जिसका नाम है "परवीन शाकिर रोड " | परवीन शाकिर की प्रमुख रचनाएँ
खुली आँखों में सपना, ख़ुशबू, सदबर्ग, इन्कार, रहमतों की बारिश,
ख़ुद-कलामी, इंकार, माह-ए-तमाम हैं |
Jaun Elia -
Subscribe to:
Posts (Atom)






